Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
तथात्मनि द्विताभानाच्चित्ते द्वैतविभासनम् ।
सर्गादौ न च भास्योस्ति न च वा नास्ति भासकः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, कारण से कार्य की उत्पत्ति होती है अन्यथा वह उत्पन्न नहीं होता यह
ही निश्चय हे । प्रलयकाल में सबका विलय होने पर जगतो की उत्पत्ति में कारण नहीं हे