Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 34
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, कारण का अस्तित्व न होने से पहले सृष्टि के आदि में ही सृष्टि का
आविर्भाव नहीं हुआ यह आपका कहा हुआ सिद्धान्त यद्यपि मैं भलीभाँति समझ रहा हूँ तथापि मेरा यह
चेत्यचेतन भ्रम किसको है यह सन्देह नहीं मिट रहा हे । इसका क्या कारण है ?