Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 51
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हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, कारणरहित बाह्यार्थरूप कार्य की जो यह सत्यता है वह केवल
भ्रान्तिरूपी है उसका, भ्रान्तिरूप से अतिरिक्त दूसरा स्वरूप नहीं है