Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 76
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 76 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 76
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, स्वप्न आदि में ओर मनोरथ, वितर्कं आदि में जो दृश्य का अनुभव
होता है वह जगद्व्यवहार के अनुभव से उत्पन्न जाग्रतूरूप संस्कार से होता है, किन्तु यह जाग्रत्
किससे अनुभव में आता है ?