Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 77
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 77 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 77
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, संस्कार से स्वप्न में क्या जाग्रत् में प्रसिद्ध अर्थ का ही अनुभव होता
है अथवा अन्य अर्थ का वैसे ही स्वप्न और मनोराज्य में जाग्रत् प्रसिद्ध अर्थ का ही अनुभव होता है
अथवा अन्य पदार्थ का यह मुझसे कहिये