Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 193, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 193, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 193 · श्लोक 21
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हिन्दी अर्थ
इस धरातल में कभी कुछ भी न भासित है और न
अभासित है यह सुनिर्मल शान्त ब्रह्म ही इस प्रकार जगत् के रूप में स्थित हे