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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

बोध होने के कारण एहिक ओर पारलौकिक कर्मफलों में तृष्णा न रखनेवाले, प्रशान्त इच्छावाले सज्जन पुरुषों को इच्छा न करने पर भी निर्वाण (मोक्ष) अपने आप प्राप्त होता है