Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
व्युत्थान काल में मन के मनन से युक्त भी (लोक-व्यवहारमें तत्पर भी)
ज्ञानी पुरुष विषयों मे आसक्ति न होने से मन के मनन से रहित है अतएव दीपक के तुल्य प्रकाश
करता हुआ भी निष्क्रिय वह यथास्थित स्वरूप ही रहता है