Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
जो सत्तासामान्य की पराकाष्ठा (परम
अवधि) शोधित तत्पदार्थरूपा है वही बोध की भी शोधित त्वम्पदार्थरूप परम अवधि है आकाश
आदिरूप तथा जाग्रत्, स्वप्न और सुषुप्तिरूप सृष्टि सत्ताबोधमय ही है, इसलिए सबकुछ शान्त
अविनाशी ही हे