Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
निर्वाण के लिए, वैराग्य के लिए तथा निर्मल शीतल बोध के लिए ब्रह्मा, विष्णु
और शिव तथा अन्यान्य प्राणी भी मैं सदा ही रह कदापि मेरा अभाव न हो यों सदा उस सत्ता की स्पृहा
करते हैं