Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
सब लोगों का सर्वाधिक स्पृहास्पद वस्तुभूत सकलप्रदेश में, सकल काल में, सकल
वस्तु रूप से उदित चेतन स्वतः स्फुरित रूपवाला शुद्ध ही है उसका विनाश (लोप) क्षणभर के लिए भी
नहीं हो सकता