Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
TODO
हिन्दी अर्थ
संसार निरतिशय दुःखरूप है ओर निर्वाण आत्यन्तिक दुःखनिवृत्तिरूप हे ।
अतिशीतल निर्वाण ही अस्तित्व है । तप्त यानी निरतिशय दुःखरूप संसार है ही नहीं