Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्न में अपने बन्धुबान्धव के मरने अथवा जीने पर भी स्वप्न
से जागे हुए पुरुष की स्वप्न में सत्यताबुद्धि उदित नहीं होती वैसे ही तत्त्वज्ञानी पुरुष की सकल दृश्यपदार्थो
में सत्यता बुद्धि उदित नहीं होती अतएव उससे उनके लाभ और नाश से हर्ष और शोक की प्राप्ति नहीं
होती है