Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 48
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हिन्दी अर्थ
भाव यानी आत्मा के
अस्तित्व, प्रियत्व आदि धर्म अभावरूप तथा अभाव (जगत् के आदि धर्म) भावरूप होकर सबके सब
सदा सर्वथा देदीप्यमान हो भासते हैं