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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 2, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

मातृमेयप्रमाणादिदेशकालौ दिगादि च । भावाभावविवर्तादिशिवपङ्कमयात्मकम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस्रीको फिर स्पष्टरूप से बतलाते हैं । हे श्रीरामजी, प्रमाता, प्रमेय ओर प्रमाण, देश, काल, दिशा आदि तथा भाव और अभाव आदि विवर्त, ये सबके सब शिवपंकमयात्मक ही हैं