Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 2, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
न वेदनं तन्नो कर्म तच्छान्तं ब्रह्म कथ्यते ।
चेतनं प्रोच्यते कर्म संसृत्याभ्रविकासितम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
की नाईं वह विकास को प्राप्त हुआ है । यही कारण है कि अनुभवी विद्वान लोग मोक्ष को
चिदाभासशून्य ही कहते हैं। उन लोगों की विवेकी शिष्य के प्रति इसी तरह की उपदेशवाणी
सुनाई देती है