Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 2, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
अचेतनं विदुर्मोक्षं ज्ञं प्रत्येवोपदेशगीः ।
त्यागो हि कर्मणां तस्मादादेहं नोपपद्यते ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह यह सिद्ध हो गया हे कि जब तक यह शरीर खड़ा है तब तक छुखपूर्वक व्यवहार होता
ही रहेया, इसी आशय से कहते हैं ।
इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, जब तक यह शरीर खड़ा है तब तक कर्मों का त्याग नहीं हो
सकता । जो लोग कर्मो की पूजा करते हैं वे लोग उसके मूल को नहीं छोड़ते