Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 204, Verses 34–35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 204, verses 34–35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 204 · श्लोक 34,35
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हिन्दी अर्थ
मृदु-मधुर वचनवाले
सत्कृत दशरथ आदि सब सज्जन पुरुष, जो सातों लोकं के निवासी थे, परस्पर पूछकर इन्द्रपुरी
से देवताओं की तरह परस्पर स्नेहपूर्ण हृदय होकर अपने-अपने आश्रमों को गये