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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 204, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 204, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 204 · श्लोक 36

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

क्रमानुसार प्रेम से एक दूसरे को सत्कार कर उनसे विदा लेकर अपने घर में आकर उन्होने दिन का कृत्य किया