Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 204, Verses 37–39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 204, verses 37–39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 204 · श्लोक 37,39

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

इसके पश्चात्‌ श्रीवसिष्ठ आदि तथा दशरथ आदि राजा-सबने दिवस के कृत्य किये | इसके अनन्तर उनके दिवस सम्बन्धी क्रिया करने पर क्रम से आकाश का पथिक सूर्य अस्त को प्राप्त हुआ । उनकी तथा महामति श्रीरामचन्द्रजी की उसी कथा से जागरणवश वह रात्रि शीघ्र व्यतीत हुई