Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 204, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 204, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 204 · श्लोक 40
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हिन्दी अर्थ
प्रातःकाल घर में झाड़ू बुहारी देने की तरह अन्धकाररूपी पांसु तारा रूपी
फूलों की राशियाँ जिसमें से हटा दी गई हैं ऐसे जगद्रूपी भवन को घर की तरह साफ सुथरा बना
रहे भगवान् सूर्य का उदय हुआ