Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 206, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 206 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
अस्त्यब्धिभ्यामुभयतो व्याप्तं ख्यातं जगत्त्रये ।
कुशद्वीपमिति द्वीपं भूमौ वलयवत्स्थितम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
उपपन्न नहीं होता, यह अर्थ है