Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 206, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 206 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
पुष्पार्घ्याचमनीयैर्मां पूजयित्वोपविश्य सः ।
मध्ये कथायां कस्यांचिदपृच्छत्प्रणयादिदम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
यह जो चिदात्मा का भानमात्र है वही स्वप्नभान
है और वही जगदाकृति चिदाकाशरूप ही स्वप्न विवर्त, जगदादि शब्द से कहा जाता है