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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 206, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 206 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

भगवन्सर्वसंहारे जाते शून्यतते स्थिते । अवाच्ये परमे व्योम्नि सर्वकारणसंक्षये ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

चिदाकाश का जो यह वेदन है यह आकाश के समान निर्मल है इस वेदन के अन्दर भासमान चित्‌ का रूप सूक्ष्म होने पर स्वप्न ओर स्थूल होने पर जगत्‌ के रूप से स्थित है यानी वेदन ही स्वप्न और जगत्‌ के रूप में स्थित है