Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 206, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 206 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
सर्गारम्भस्य भूयः स्याद्वद किं मूलकारणम् ।
कानि वा सहकारीणि कारणानि कुतः कथम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार रूपप्रपंच के वेदनमात्र होने पर नामप्रपंच भी वेदन का ही एक नाम भेद प्रसिद्ध होता है,
ऐसा कहते हैं।
इसके उपरान्त चारों ओर व्याप्त हुए अपने स्वभावकचन (स्फुरण) में उस चिद्रूप चिदात्मा ने ये
पृथिवी आदि पृथक् पृथक् संज्ञाएँ की हैं