Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 208, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 208, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 208 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
चिदात्मकतया भान्ति नानात्मकतयात्मना ।
अप्येकसारास्तिष्ठन्ति नानाकारस्वभावगाः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
इससे माता पित्राद्यमावो5पि' इस प्रश्न का भी समाधान हो गया, ऐसा कहते हैं।
शरीर हो चाहे मत हो । जहाँ-जहाँ चिदाकाश है वहाँ वहाँ वह द्वैताद्रैतमय जगत्रूप आत्मा को
जानता है