Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 209, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 209, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 209 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
संकल्पनगरे ब्राह्मे जगत्यस्मिन्महामते ।
किं नाम नो संभवति सत्यं वाप्यसमञ्जसम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे द्रष्टा, दृश्य आदि जगत् कल्पनानगर एकमात्र कल्पना ही है वैसे वह
स्वयं जगत्-सा प्रतीत होता है । उसके जन्म का भी वाणी से व्यपदेश होता है, वास्तव में वह नहीं
होता है