Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 211, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
यदेव चित्तसंकल्पस्तदेव नगरं यथा ।
तदा तथायं ब्रह्माच्छं तदेव जगदुच्यते ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे संवित् की एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में प्राप्ति होने पर मध्य में (दो प्रदेशों के
अन्तराल में) संवित् का स्वरूप निर्विषय रहता है वैसे ही द्वित, अद्वैत आदि यह सब कुछ निर्विषय
चिन्मात्रमय है