Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 211, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
सिद्धसाध्ययमब्रह्मविद्याधरदिवौकसाम् ।
अन्येषामपि भूतानामपूर्वाणां महात्मनाम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी चन्द्रमा में सबके सव ध्यानकर्ता क्यों प्रविष्ट नहीं हुए, क्योंकि ऐसा करने मे लाघव है । इस
प्रश्न पर कहते है।
मैं चन्द्रबिम्ब के सुख से युक्त होकर चन्द्रमा में प्रविष्ट होऊ, ऐसा ध्यान करनेवाला पुरुष उस
प्रकार के सुख का भागी बनता है, ऐसा निश्चय है । भाव यह कि उन सबने वैसा ध्यान नहीं किया यानी
"एक ही अमुक चन्द्रमा में प्रविष्ट होऊ" सवने ऐसा ध्यान नहीं किया, किन्तु तुम्हारे प्रश्न के अनुसार
“आकाश में अक्षयपूर्ण चन्द्रमा होऊँ” इस कामना से सबने ध्यान किया