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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 214, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 214, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 214 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

कर्मणामवधिः पूर्णो दृष्टः सीमान्त आपदाम् । ज्ञातं ज्ञेयमशेषेण विश्रान्ताः स्मः परे पदे ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

सब भूत नष्ट हो जाते हें । सकल जगतों के भान के साथ आकाश का भी अव्याकृत में लय होने से नाश हो जाता है, क्योकि भोग्य की स्थिति भोक्ता की स्थिति के अधीन है, प्रलय काल में भोक्ता का ही सम्भव नहीं है