Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 214, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 214, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 214 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
ध्यानलब्धपरव्योमचिरानुभवनभ्रमैः ।
धारणाधारविश्रान्त्या देहसंत्यजनक्रमैः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मा, विष्णु आदि ही उस समय भोग्य के भोक्ता रहेगे एसी किसी को आशंका हो तो उसके
निवारण के लिये कहते हैं।
ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र आदि जो कारणों के भी कारण हैं उनका महाकल्प के अन्त में तथा विज्ञानजन्य
प्राकृतिक प्रलय में नाम-निशान तक नहीं रहता, अतः वे भोग्य वस्तु के भोक्ता कैसे रहेंगे ?