Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 22, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 22, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

असत्यप्रतिभासानामेतदेवाशु कारणम् । यदनालोकनं नाम समालोकक्षणक्षयम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

द्वैत का निष्कारण अस्तित्व मानने पर अनिर्मोक्ष-प्रस्नक्ति एवं मोक्षशातर मे अप्रमाण्य आ जायेया, इसलिए इन दोनों कोको की निवृत्ति करने के लिए किसी कारण की अवश्य कल्पना करनी चाहिए, यदि यह काहिए, तो इस पर यही समाधान हो सकता है कि एकमात्र ज्ञान से निवृत्त होनेवाला मिथ्याभूत अज्ञान ही कारण है, यही कल्पना करना चाहिए, दूसरे कि सद्रूप की नहीं: क्योंकि सद्रूप वस्तु की ज्ञान से निवृत्ति हो सकने के कारण आपका अनिर्मोक्ष-प्रसंय ज्यों-का- त्यो बना रहेया, इस आशय से कहते हैं । भद्र, मिथ्याभूत जो पदार्थ हैं उनका यही एकमात्र कारण है, जिसका कि नाम अनावलोकन यानी अज्ञान है और इस अज्ञान का ज्ञान-क्षण में तत्काल ही विनाश हो जाता है