Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
एते ग्रामैकशरणाः पल्लवाः स्पन्दभीरवः ।
अयथापथसंचारा हरिणा इव जन्तवः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
ये सब पुलिन्द
जाति के जन्तु लोग जंगली एक छोटे-से गाँव में रहते हैं, जनपद के स्पन्द से बहुत डरते हैं तथा
उटपटांग मार्ग मे इधर-उधर मृगो की तरह घूमते-फिरते हैं (२)