Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
कामार्थरागसद्वेषपरिनिष्ठितपौरुषाः ।
कर्मण्यापातमधुरे रमन्ते दग्धबुद्धयः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
काम और अर्थ में ही इनका सम्पूर्णं पौरुष परिनिष्ठित
रहता है तथा मुग्ध बुद्धि वे आपातरमणीय कर्मो में ही रमण किया करते हैं