Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
निमेषास्वादमधुराः क्षणान्तरविरागिणः ।
मारणैकान्तनिरता ग्राम्या विषकणा इव ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
निमेषमात्र के लिए आस्वाद मे मधुर, क्षणभर में ही बिगाड़
कर देनेवाले तथा प्राण लेने में सदा तैयार रहनेवाले ये ग्रामीणजन, मधुमिश्रित विषकण के समान
हैं