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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

न च मे गन्तुमुद्योगो विरक्तमनसो गृहम् । दृष्ट्वा तडित्सकाशानि भूतानि भुवनोदरे ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मुने, इस ब्रह्माण्ड के उदर में बिजली की चमक के समान क्षणभंगुर भूतो को देखकर विरक्तमन मुझे घर जाने की इच्छा नहीं होती