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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

भगवन्सत्यमात्मानं कथयेहानुकम्पया । गम्भीराणि प्रसन्नानि साधुचेतःसरांसि हि ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन्‌, इस दीन के ऊपर दया करके अपना नाम, गोत्र आदि कथनपूर्वक ठीक-ठीक इसे परिचय दीजिये (<) क्योंकि महात्माओं के चित्तरूपी सरोवर गम्भीर और निर्मल रहते हैं