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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 24, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

पुनर्जातं पुनर्नष्टं सुखदुःखभ्रमः सदा । अवश्यंभाविपर्यन्तदुःखत्वात्सकलान्यपि ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

लओं के साथ खेद का ही विस्तारयूर्वक वर्णन करते हैं / बार-बार जन्म ओर बार-बार मरणरूप संसार सदा दुःख के भ्रम से युक्त है