Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अहो बतातिविषमा वासना यद्वशाज्जनैः ।
अविद्यमानैरेवायं भ्रमोऽन्तरनुभूयते ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
अहो, यह वासना अतिविषम है,जिसके वश से मनुष्य
मिथ्याभूत द्रष्टा आदि त्रिपुटीरूप अर्थो से अपने भीतर यह संसारभ्रम का अनुभव करने लग जाते हैं