Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 27, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 27, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 27 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अविद्यमान एवास्मिन्मा बिभीहि जगद्भ्रमे ।
एतदेव परं सत्यं विद्धि सत्यविदां वर ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सत्यज्ञानियों में श्रेष्ठ श्रीरामजी, यह जगत् की भ्रान्ति अविद्यमान
ही है, अतः इससे आप भय मत कीजिये । यही बात परम सत्य है, यह आप जानिये