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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 27, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 27, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 27 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

जगदस्ति न सत्तेति यासीद्भ्रान्तिस्तवाद्य सा । शान्ता मदुपदेशेन किमन्यद्बन्धकारणम् ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, अभी तक जो आपको भ्रम रहा कि जगत्‌-वस्तु की ही सत्ता है और ब्रह्म सत्ता है ही नहीं, वह आज ही मेरे उपदेश से शान्त हो गया । अब दूसरा बन्धन देनेवाला क्या रहा अर्थात्‌ कुछ नहीं