Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 28, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
चिता विना धराकोशादत्यन्तपरिपेलवात् ।
अङ्कुरान्वज्रसारांश्च क उल्लासयितुं क्षमः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
चिति के बिना ऐसा कौन शक्तिमान् है, जो इस पृथ्वीतल से,
अत्यन्त मृदु अंकुर से वज्र के सदृश दृढ प्रवाल आदि को निकाल सके