Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 28, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यदि सर्वगता संविद्भवेन्नातिबलीयसी ।
तत्क उल्लासने शक्तः स्याद्देवासुरभूभृताम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, भला,
बतलाइये तो सही कि यदि सर्वत्रस्थित यह संवित् अत्यन्त बलवती न होती तो, इन देव, असुर एवं
राजाओं के निर्माण में कौन शक्तिशाली होता ?