Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
मुदितो भव हर्षेषु दुःखेषु भव दुःखितः ।
करुणां कुरु दीनेषु भव वीरेषु वीर्यवान् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
हर्ष करने योग्य स्थानों में हर्षित होइए, दुःख करनेयोग्य स्थानों
में दुःखी बनिये, दीनों पर दया कीजिए ओर वीरो मे वीर बनकर रहिए