Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
जगद्वृक्षपदार्थौघपुष्पामोदश्रियं पूराम् ।
संविदं संविदः स्वस्थामास्वान्तर्मुखमच्युतम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रामभद्र, जगद्रूषी वृक्ष के पदार्थरूपी
पुष्पों की सुगन्धशोभा के सदुश सारभूत स्वस्थ ब्रह्मसंवित्ति का (आत्मज्ञानका) अवलम्बन कर
समस्त बाह्यवृक्तियों को सदा अन्तर्मुख बनाकर स्थित रहिए