Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
अन्तर्वृत्तिविहीनेन बहिर्वृत्तिमतेव च ।
सुप्तप्रबुद्धप्रायेण कार्यमाचर चेतसा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
अन्दर की सुख -दुःखादिवृत्ति से शून्य, बाहर की घटादिवृत्ति से युक्त-से तथा प्रायः
आधे जगे हुए चित्त से आप कार्य करते चलिए