Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
बालमूकादिविज्ञानवदन्तस्त्यक्तवासनम् ।
भवतः कुर्वतः कार्यं खवच्चित्तं न लिप्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे बालक एवं मूक आदि का विज्ञान अंदर
की वासना से रहित होता है, वैसे ही अन्दर की वासना से शून्य अतएव आकाश के सदृश निर्मल
हुआ चित्त कार्य कर रहे आपको बन्धनकारक नहीं होगा