Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
असंकल्पकलङ्कायां ज्ञानाच्चित्तक्षयोदये ।
शुद्धायां संविदि स्थित्वा कुरु मा कुरु वानघ ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे निष्पाप रामजी, ज्ञान से चित्त का विनाश हो जाने पर बची हुई संकल्परूपी कलंक से निर्मुक्त
विशुद्ध ब्रह्मचिति में बैठकर आप कुछ कीजिये या न कीजिये दोनों एक-से हैं