Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
तत्त्वज्ञस्त्वधुना जातो विश्रान्तः परमे पदे ।
योग्यो न सविकल्पानामुत्तराणामसि स्फुटम् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
अब तो आप तत्त्वज्ञ बन गये और परम पद में स्थिति भी आपने प्राप्त कर ली, इसलिए
स्पष्ट है कि विकल्पवाले उत्तरों के योग्य नहीं रहे