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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 62

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

अयमाकाशमेवाहं यदि शाम्याम्यवासनम् । वासनां तु न बध्नासि स्थित एवासि चिन्नभः ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

यह मैं चिदाकाशस्वरूप ही हूँ, इस प्रकार निश्चयकर वासनानिर्मुक्त हो उत्तमशान्ति से सम्पन्न हो गया हूँ। आप भी यदि वासना को कहीं न बाँध लें, तो चिदाकाशरूप ही होकर स्थित हैं